लाईफ-स्टाइल योगगुरू श्रीमती.हंसाजी जयदेवा योगेन्द्र – इच्छाओं में कमी करना

Posted on August 27 2012 by yogesh


संसार में सच की जरूरत पूरी होने के लिए काफी कुछ है, पर एक लालची व्यक्ति की जरूरत के लिए कम है.

आवश्यकता से अधिक पाने की इच्छा का त्याग करना. जितना हम अपनी इच्छाओं को बढ़ाते जाएंगे उतना ही हम उनके गुलाम बनेंगे और हमपर अपना नियंत्रण नही रहेगा. योग में अधिक से अधिक आसन सीखने की इच्छा करना भी सही नही माना जाता है, क्योंकि जब थोड़े ही आसन करने से हमारी आवश्यक्ताओं की पूर्ति हो सकती हो, तो ज्यादा आसन करने में समय और कर्मशक्ति क्यों बरबाद करें.

योगेंद्र प्राणायाम ४ एक ऐसा ही प्राणायाम है, जिसमें हमें कई फायदे एक साथ हो सकते हैं.

विधि:

  • आसन पर पीठ के बल लेट जाए, पैरों को सिकोड़कर कुल्हों के नजदीक लाएं.
  • दाएं हाथ को हल्के से पेट-नाभि के ऊपर रखें
  • धीरे से श्वास खींचे, पर पेट को गुब्बारे की तरह न फुलाएं
  • तुरंत धीरे धीरे श्वास छोड़ते हुए पेट अंदर ले जाएं
  • श्वास खींचने और छोड़ने की गति और समय बराबर होना चाहिए. ध्यान श्वास प्रक्रिया पर रहे.
  • यह प्रक्रिया २० बार दोहराएं

 
लाभ:

  • शिथिलीकरण होता है
  • पाचन क्रिया ठीक रहती है
  • पेट की चर्बी कम होती है. पेट की चर्बी पर असर होता है
  • एकाग्रता बढ़ती है
  • श्वसन सहज होता है
  • नाभि चक्र पर ध्यान होने से संपूर्ण शरीर का ज्ञान मिलता है

 
उपयोग:

जीवनभर हम वस्तुओं का संचय करते रहते हैं. उनमें से शायद ही हमें एक चौथाई की आवश्यकता रहती है. परंतु अपनी इच्छाओं पर हमारा वश न होने के कारण हम इस मूल बात को समझ नहीं पाते. जो अपने पास है, उसमें संतुष्ट नही होतें और अधिक से अधिक पाना चाहते हैं. पर उतना पा लेने के बाद भी हम संतुष्ट नहीं होते क्योंकि इच्छाओं का कोई अंत नहीं है.

कहानी:

एक आदमी का छोटा सा घर है. उस घर में एक ही कमरा है जिसमें सात व्यक्ति रहते हैं. उनको घर में जगह कम पड़ती है और दूसरी जगह लेने के लिए कोई जरिया नही है वह परेशान होकर साधु के पास जाते है. साधु उसे एक बकरी का जोड़ा खरीदकर घर लाने को कहते हैं. इस से जगह और भी कम पड़ती है. वह परेशान होकर फिर से साधु के पास जाता है. साधु इस बार मुर्गी भी रखने को कहता है, इस से घर और भी छोटा लगता है. वह आदमी परेशान हो जाता है. मुर्गा, मुर्गे के चुज़े होते हैं. जगह और भी कम पड़ती है. वह साधु के पास फिर से जाता है तो इस बार साधु सब को घर से बाहर निकालने को कहते हैं. अब वही छोटी जगह बड़ी लगने लगती है.  

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