देश के ४० बड़े और राजनैतिक घरानों को मिलते हैं देश के सभी कामों का ठेका

Posted on August 27 2012 by yogesh

मुंबई (चंदन पवार): Email : chandanpawar.pits@gmail.com

“जिसकी लाठी उसकी भैस” इस कहावत को सच कर दिखाने में हमारे देश के बड़े और राजनैतिक घराने सच करते हुए दिखाई दे रहे हैं. पिछले २० सालों से देश के हित के लिए जो भी बड़े टेंडर निकाले जाते हैं. उसको हासिल करना कहे या पहले से ही मान कर चलें कि इन्ही ४० घरानों को ही इसका काम मिलनेवाला है. चाहे वो २जी स्पेक्ट्रम, कोल उत्खनन, प्राकृतिक संसाधन, पावर, रास्ते, पुल हो या छोटे-मोटे कामों का भी टेंडर इन घरानों को ही मिलता है.


क्या इनको यह टेंडर इनकी काम के प्रति ईमानदारी देखकर मिलता है? या इन्ही के साथ व्यवसाय हो सकता है, यह सरकार सोचकर बैठी है. क्योंकि देश में और कितने इंडस्ट्रियालिस्ट हैं जो यह काम करना चाहते हैं. इन कामों के लिए यह लोग टेंडर भी भरते हैं मगर इनके टेंडर को मान्यता नहीं मिलती बल्कि पहले से सुची बनाए हुए घरानों को काम देकर अधिक पैसे जोड़ने का अवसर प्रदान किया जाता है. ऐसे में कुछ सवाल पैदा हो रहे हैं. क्या देश में इन्ही लोगों की जागीरदारी है? क्या दूसरे उद्योगपतियों को देश में कोई काम नहीं मिलेगा? या सरकार देना ही नहीं चाहती है! यह समझ के परे है. देश के हर व्यवसाय में अपने ही कंपनी को काम मिले ऐसी सोच बनाए बैठे यह लोगों का सपना सरकार भी साकार कर रही है. यह लोग हर एक व्यवसाय पर अपना कब्जा जमाए बैठे हैं.

सत्ता में बैठे लोग अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए यह सब कर रहे हैं परंतु इसके अलावा यह लोग अपने रिश्तेदारों के रिश्तेदारों को भी इस चौकड़ी में शामिल कर लेते हैं. कब तक देश में लोकशाही के नाम पर यह गोरखधंधा चालु रहेगा?क्योंकि ईमानदारी से इस युग में काम निकालना बड़ा मुश्किल हो गया है. सरकार भी अपनी आंख और कान बंद कर बैठ गई है. ऐसे में देश में अराजकता पैदा होना स्वभाविक है. इस अन्याय का विरोध कौन करेगा क्योंकि जो व्यवसायी इस सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाता है तो यह सरकार उसके ऊपर साढ़े साती की तरह टूट पड़ती है. इन्कम टैक्स, पुलिस, कामगार मंत्रालय और ना जाने कितने विभाग इन बेचारे व्यवसायियों के पीछे पड़ जाते हैं. ऐसे में एक व्यवसायी यही सोचेगा कि एक रूपया नहीं तो सही २५ पैसे तो सुख के पल बिताकर तो मिल रहे हैं. ऐसे सोच का फायदा ही सरकार उठाने में माहिर है. गलत व्यवस्था के खिलाफ लड़ने के लिए तो कोई बचता ही नहीं है. जो भी देश के हित में लड़ रहे हैं उनको भी इन लोगों ने अपने आंदोलन से बाहर कर दिया है.

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