सप्ताह की खास मुलाकात मयंक गांधी – सदस्य, टीम अन्ना

Posted on July 30 2012 by pits

भ्रष्टाचार कम करने के लिए डंडे की जरूरत है
मयंक गांधी वर्तमान समय में बुनियादी ढ़ांचा परियोजनाओं से संबंधित रणनीतिक योजना के स्वतंत्र सलाहकार हैं. इस से पहले वह ‘रैमेंकिंग ऑफ मुंबई फेडरेशन’ के सचिव रह चुके हैं. साथ ही साथ मयंक गांधी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन लड़ रहे अन्ना हजारे के टीम के सक्रीय सदस्य हैं. इसके अलावा यह बहुत से गैर सरकारी संघठनाओं से भी जुड़े हुए हैं. हाल ही में हमारे संवाददाता गौतम कोरडे से की हुई बातचीत.

आप भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना हजारे के आंदोलन से कैसे जुड़े?
देश के लिए कुछ करना चाहिए,ऐसा मुझे लगता था. वर्ष २००२ से मैने इस संदर्भ में काम चालू किया. मैं समझता हूं कि चीजों के प्रति उदासीन होकर कुछ नहीं हो सकता है. फिर मैं एक एनजीओ से जुड़ा और जब अन्ना हजारे २००३ में ‘सूचना के अधिकार’ के लिए अनशन पर बैठे तब मैं उनके साथ था. साथ ही अन्य गैर सरकारी संस्थाओं के के लिए भी कार्य करता था और मेरी अरविंद केजरीवाल से भी अच्छी दोस्ती थी. फिर उन्होने २०११ में मुझे इस आंदोलन से जुड़ने के लिए कहा तो मैं उनके साथ जुड़ गया.
लोकपाल बिल का मुद्दा पूरे भारत में फैल चुका है फिर भी यह बिल पास नहीं हो रहा है, इसपर आपकी प्रतिक्रिया जानना चाहेंगे?
यह बहुत लंबी लड़ाई है, यह इतनी आसानी से नही हो जाएगा. लोगों को एकत्रित करना पड़ेगा तब कहीं जाकर यह बिल आ पाएगा.

क्या अनशन से भ्रष्टाचार खत्म होगा?
जब तक अन्ना हजारे जैसे लोग अनशन पर बैठते नहीं हैं और अपनी जान दांव पर लगाते नहीं तब तक तो सरकार सुनती नहीं हें क्योंकि सरकार बहरी है. हमको अनशन करने का शौक नहीं है मजबूरन देश के लिए आंदोलन करना पड़ता है.

आप लोगों ने जिन भ्रष्टाचारी नेताओं के खिलाफ मुहिम छेड़ी है उनके द्वारा आप लोगों को कोई धमकी आई है?
नहीं, हमें ऐसी कोई धमकी नही आई है.

तो क्या यह मुहिम आप लोगों द्वारा जारी रहेगी?
जी बिल्कुल जारी रहेगी. क्योंकि हमने एक बार सरकार पर विश्वास कर के धोखा खा लिया है अब दुबारा ऐसा विश्वास नहीं रखेंगे.

यदि इस बार भी सरकार नहीं मानी तो आप लोगों का अगला कदम क्या होगा?
देखिए हम तो प्राण देने को तैयार बैठे हैं. अब देश की जनता को सोचना है कि उनको क्या करना है?

ऐसी भी खबरें हैं कि टीम अन्ना में दरारें पड़ गई है?
जी बिल्कुल नहीं. एक भी सदस्य नहीं है जो अलग हुआ है. इतने सारे लोग हैं सबकी अपनी अपनी विचारधारा है, यह सब तो चलते रहता है.

जन लोकपाल को लेकर आप जनता से क्या कहना चाहते हैं?
देखिए एक रूपये में से १५ पैसा लोगों तक पहुंचता हैं, बाकी सारा पैसा भ्रष्टाचार में चले जाता है. अगर भ्रष्टाचार कम हो जाए तो कर(टैक्स) भी कम हो जाएगा और मंहगाई भी. भ्रष्टाचार कम करने के लिए डंडे की जरूरत है. यदि ऐसा कानून आए कि भ्रष्ट लोग जेल में चले जाए तो इस से बहुत फर्क पड़ेगा इसलिए मुझे लगता है कि जन लोकपाल बिल आना बहुत जरूरी है.

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