रमज़ान की बरकतें…

Posted on July 30 2012 by pits

मुंबई(रजिया निसार):
रमजान का महीना प्रति वर्ष बारीश के मौसम की तरह आता है पर इसका पानी पेड़-पौधों और खेत खलिहानों को नहीं भिगोता बल्कि लोगों के दिलों को भिगोता है जिनमें ना जाने कितनी बुराईयां, निराशा, गुस्सा, बैर छुपा होता है. इस महीने में लोग खुदा की इबादत करके उसके करीब हो जाते हैं और इन बुराईयों पर एक हद तक काबू पा लेते हैं, ऐसा रोज़ा रखने और इस्लाम धर्म के माननेवालों का है.
‘अल्ला हु अकबर’ यह वह शब्द हैं जिसे सुनकर एक मुस्लिम व्यक्ति रोज़ा(उपवास) रखता है और तोड़ता है. यूं तो इस्लाम धर्म में हर त्योहार का अपना महत्व होता है पर रमज़ान का महीना इस्लाम के पन्नों में पाक महीना माना गया है. इस पूरे एक महीने में इस्लाम के माननेवाले अपने रब को खुश और राजी करने के लिए पूरे एक महीने में प्रतिदिन बिना जल ग्रहण किए सुर्योदय से लेकर सुर्यास्त तक उपवास रखते हैं. ऐसा माना जाता है कि अन्य दिनों में अच्छे काम करने से खुदा उन्हे सवाब(पुण्य) देता है परंतु रमज़ान के महीने में यह सवाब कई गुना बढ़ जाता है. रमाजान का महिना इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवें महीने में आता है.

इस्लाम के माननेवालों का ऐसा कहना है कि ‘यदि सामान्य लोगों को रमज़ान महीने की बरकत का इल्म(जानकारी) हो जाए तो वह यही चाहेगा कि पूरे साल रमजान ही हो.” यह खुदा के माननेवालों का आत्म परिक्षण होता है, उनके आत्म संयम का इम्तिहान तथा उनका अपने रब के ऊपर दिखाया गया प्यार होता है. इस महीने में लोग शराब पीना तथा बूरी चीजों को करने से डरते हैं क्योंकि इस महीने में खुदा का खौफ उन्हे ज्यादा होता है. इस्लाम धर्म की धारणा जिस बुनियादी बातों में छिपी है वह है दया, धैर्य, दान और सहानुभूति. तर्कशास्त्री रमजान के महीने को इस तरह भी देखते हैं कि एक दिन व्रत रखकर वह अपने प्रयोग में लाए जानेवाले अन्न को मुफलिसों(गरीबों) में बाटें. इस्लाम के ज्ञाताओं का कहना है कि उनका खुदा उन अमीर लोगों को भूख का एहसास दिलाना चाहता है,जिनके पास अन्न और संपत्ति की कोई कमी नहीं होती.
ऐसा माना जाता है कि रमज़ान के महीने में लोगों पर अल्लाह की रहम होती है और गरीब से गरीब घरों में भी खाने की चीज उपलब्ध हो जाती है. मुंबई जैसे शहर में जहां लोगों के पास सांस लेने तक की फुरसत नहीं होती, वहां भी लोग जगह जगह रोजे तोड़ते हुए नज़र आते हैं. पकवानों की बहार सी होती है. यह त्योहार भारत जैसे देश में बड़े उत्साह से मानाया जाता है. जहां हिंदु धर्म के लोग इस्लाम के माननेवालों के घरों में इफ्तार करने के लिए बड़ी खुशी से जाते हैं.

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