बच्चों से भी कुछ सिखना चाहिए …

Posted on July 30 2012 by pits

मुंबई : हमारे घर में अगर कोई भी छोटा बच्चा हो तो परिवार के सभी लोग उसे कुछ न कुछ सिखाते है. माता-पिता तो जैसे उस बच्चे के शिक्षक बन जाते है. लेकिन कभी-कभी बच्चे अनजाने में ही कुछ ऐसी बातें कह जाते है या कर जाते है जो अपेन जीवन में पूरी जिंदगी में काम आ सकता है और सिखना चाहिए कि जिंदगी जीने के असली मायने क्या है.

जब बच्चा पैदा होता है तो माता-पिता का एक ही सपना होता है कि वह उनके जैसा बने या उनसे भी अधिक नाम कमाए और तरक्की करें. हर माँ-बाप अपने बच्चे में अपनी छवि देखना चाहते है. अपने सपने उनके नाजुक कंधो पर थोपने लगते है. अगर बच्चे को कुछ सिखाना ही है तो उसे ऐसे तरिके सिखाए जो दुनिया में जीने के लिए उपयोगी होता है. उसे हर चींज सिखाने की बजाए एक ऐसा वातावरण दे जिसमें वह खुद ही सिखे और दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लायक हो जाए. पालन पोषण का मतलब यह नही है कि आप उसे सिखाए की क्या गलत है और क्या सही. पालन-पोषन तो उसे प्यार और प्रोत्साहन दे कर भी किया जा सकता है. अगर कोई बच्चा अपने पैरो पर चलना सिखता है और गिरने पर रोता भी है उस वक्त हम जो प्रोत्साहन उसे देते है वही हमें उसके बडे़ होने पर भी देना चाहिए. हमें उसे वे सारी चींजे करनी देनी चाहिए जो उसे करनी है और समाज में रहने के अच्छे तौर तरिकों की उसे समझ देनी चाहिए, परंतु प्यार से जबरदस्ती से नही.

अगर हम अपनी तुलना उस बच्चे से करें तो वह बच्चा हमसे काफि समझदार होता है. उसका जीवन हमसे अधिक खुशहाल और आनंद भरा होता है. हम हमारे जिंदगी में कई परेशानियों का पहाड अपने उपर ढोए चलते है. दिल और दिमाग के बीच की कश्मकश में फंसे रहते है. अगर हम इनमें से किसी एक की भी बात उनसे सुने तो जिंदगी की आधी परेशानियां तो ऐसे ही खत्म हो जाऐगी. जबकि बच्चा हमेशा वही करता है जो उसका दिल कहता है. उसे सही और गलत का कोई अंदाजा नही होता है. वह तो अपनी ही दुनिया में मस्त रहता है. उन्हें सिखाने से अच्छा है कि हम उनसे भी कुछ सीखें.

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