मुंबई पुलिस की ‘नाइट लाइफ’ में दखल अंदाजी सही या गलत?

Posted on June 25 2012 by pits

मुंबई (पिंकी सिंह) – मुंबई की शान कही जानेवाली ‘नाइट लाइफ’ इन दिनों सुनी और खाली लगने लगी है. ऐसा नही है कि मुंबई के डिस्कोस और पब में लोगो ने जाना बंद कर दिया, बात यह है कि आए दिन इन जगहो पर पुलिस कि बेवजह की रेड से लोग काफी परेशान है. मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मानी जाती है वह सिर्फ बॉलीवुड की चकाचौंध ही नही बल्कि उसकी चमकीली रातो के लिए भी जानी जाती है. कहते है मुंबई मे जिंदगी रात मे शूरु होती है. दिनभर की भागदौड़ रात मे तो इसकी चमक दुगुनी हो जाती है. रात मे डिस्कोस, पब, बार और रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर लोग आते है. पर यहां पर भी उनके रंग मे भंग डालने पुलिस आ धमकती है. पर क्या पुलिस का इस तरह रेड करना सही है?

कुछ दिनो पहले मुंबई के वर्ली मे स्थित एक लॉज मे मुंबई के पुलिस ने रेड मारी और कारण यह बताया कि इस लॉज के पास डिस्को चलाने का परमिट नही है. पुलिस का यह भी कहना था कि यहां पर उम्मीद से ज्यादा लोग उपस्थित है. वे उन लोगो को घंटो लाइन मे खडा कर उनसे उनका नाम और पता लेते रहे. पिछले दो महिनो से मुंबई के कई प्रसिद्ध होटलो और बारो मे ऐसी रेड पडती रही है. आश्चर्य की बात तो यह है कि रेड करने से पहले वे उस जगह का वीडियो शूट कर लेते है ताकि वे उसे सबूत के तौर पर कोर्ट मे उसे पेश कर सके. इस तरिके से हो रहे बेवजह छापो के कारण होटल तथा बार के मालिको के बिजनेस पर तो असर हो ही रहा है पर लोग भी इन छापो से काफी परेशान हो रहे है.

अब तो लोग रात मे कही बाहर डिनर  या पार्टी मे जाने से पहले सोचते है और शायद उन्हें यह भी चिंता सताए रहती है कि कही पुलिस इस बार यहां न आ जाए. पुलिस की इस तरह कि दखल से अगर किसी को सबसे बुरा लगा है तो वे है युवा पीढी़. क्योंकि इन जगहो पर सबसे ज्यादा वे ही जाते है. युवाओ ने तो पुलिस के खिलाफ टि्वटर पर मुहिम ही छेड दी है. कई लोगो का यह कहना है कि उनके खिलाफ तो कार्यवाही की जानी चाहिए. कुछ का कहना है कि वे महिलाओ से ठीक व्यवहार नही करते है. यह युवा कहते है कि अगर उन्हें ध्यान देना ही तो देश मे हो रहे अन्याय, महिलाओ के साथ हो रहे बलात्कार, हत्या जैसे मामलो पर ध्यान देने की जरूरत है. उनका मानना है कि इस तरह कि पार्टियो मे आकर रेड करना पब्लिसिटी स्टंट है. आम आदमी ही नही, बॉलीवुड भी पुलिस के इस रवैये से खफा है. कई स्टार्स ने तो उनके खिलाफ तीखी टिप्पणी भी कि है. वही जहां लोग उनकी बुराइया कर रहे है वही कुछ लोगो का कहना है कि वह जो कुछ भी कर रहे है ठीक कर रहे है. देश मे कानून भी एक चीज है. जिसका पालन वह कर रहे है.

पर क्या इस तरह से उनके खिलाफ बुराइंया करना सही बात है. जब देश मे कोई भी आतंकी हमला होता है तो हमे यह कहने मे जरा भी हिचकिचाहट नही होती कि पुलिस ने अगर अपना काम ठीक तरिके से किया होता तो यह सब नही होता. किसी मॉल या मंदिर मे सेक्योरिटी चेंकिंग मे भी कभी-कभी हमे परेशानी होती और कहते है कि यह तो समय की बर्बादी है. एक तरह हम ही है जो हमारी सुरक्षा मे लगे इन लोगो को कोसते है और दुसरी तरफ इनके काम मे सहयोग करने से कतराते है. फिर ऐसे मे कोई घटना हो जाती है तो हमे कोई हक नही बनता है कि हम उनसे सवाल पुछे कि उन्होंने क्यों अपना काम सही तरिके से नही किया? एक चीज जिससे हर इंसान को परिचित होना जरूरी है हमेशा इस तरह की पार्टीयों मे सबकु्छ अच्छा हो जरूरी नही है. यहां पर मौज मस्ती के नाम पर गैरकानूनी ढंग से नशीली चीजों का सेवन भी हो सकता है. इस तरह कि पार्टीयो मे शराब तो आम बात है उनमे नशीली चींजे मिलाकर लड़कियों के साथ दुर्व्यव्हार भी होता है. अब यह हमपर निर्भर करता है कि हम किस तरह से अपने आप को सुरक्षित रख सकते है.

पुलिस को उसके कार्य मे सहयोग करना हमारा फर्ज बनता है. पार्टी का यह मतलब नही है कि आप पूरी रात पार्टी करते रहे, हर चीज का एक समय होता है. अगर आपके पास सही डिस्को, पब या रेस्टोरेंट या फिर रास्ते पर लगा ठेला ही क्यों न हो, आपके पास उस जगह के सही कागज और लाइसेंस है तो पुलिस के रेड करने से आपको परेशान होने या डरने की कोई जरूरत नही है. अगर उसमे कोई गलत काम नही हो रहा है तो तलाशी लेने देनी चाहिए क्योंकि आप गलत नही है. अगर फिर भी आपको पार्टी करनी हे तो आप अपने घर पर ही दोस्तो के साथ पार्टी कर सकते है.

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