मंत्रालय मे आग लगी या लगाई गयी? महाराष्ट्र के मानबिंदु पर संकट गहराया

Posted on June 25 2012 by pits

 

मुंबई(गौतम कोरडे) - महाराष्ट्र के हर कोने से महाराष्ट्र की आम जनता अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर मुंबई के मंत्रालय में अक्सर आती है. राज्य का मानबिंदु कहे जानेवाले मंत्रालय में गुरुवार दोपहर 2 बजकर 40 मिनट पर चौथे मंजिल में भीषण आग लगने से अफरा तफरी मच गई और इस आग की चपेट मैं चौथी मंज़िल के साथ साथ पांचवी, छठी और सातवीं मंजिल भी जलकर खाक हो गई. इस आग की वजह से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री के कार्यालय तथा नगर विकास, आदिवासी विकास, शालेय शिक्षण, अल्पसंख्यक विकास, दुग्धविकास, मुख्यसचिव कार्यालय, आयटी विभाग के दफ्तर इस आग की चपेट मे आ गए. यह आग इतनी तेज थी कि उसे काबू में लाने के लिए फायर ब्रिगेड को 12 घंटो की कड़ी मशक्कत करनी पडी. इस आग में 13 लोग बुरी तरह से घायल हो गए और पांच लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. घायलों की स्थिती अब भी चिंतनीय बनी हुई है. हर महिने के दूसरे शनिवार को मंत्रालय बंद रहता है तब पूरे मंत्रालय में फायर ड्रील किया जाता है. लेकिन ऐसे समय मे फायर ड्रील कोई भी काम में नही आया. फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों द्वारा आग को काबू में करने का प्रयास काफी सफल रहा. एक तरफ मंत्रालय जल के खाक हो रहा था और इस आग मे न जाने कितने महाराष्ट्र के जरुरतमंदो के सपने भी बिखर रहे थे. महाराष्ट्र के ग्रामीण विभाग से कई लोग अपनी जरुरतों और सरकारी योजनाओं के लिए अक्सर मंत्रालय आते जाते है. इस आग की वजह से न जाने कितने भ्रष्ट नेताओ, सरकारी बाबू, और घोटालों की फाइलें जलकर राख हो गई. कहा जा रहा है कि लगभग 2 लाख फाइल्स जलकर राख हो चुकी हैं. जिन पर सरकार द्वारा केस और कार्यवाही चालू थी. मंत्रालय की आग से भ्रष्ट नेता और सरकारी बाबू चैन की सांस ले रहे होंगे. जो सत्ताधारी पक्ष है उन्हें भी जवाब देना होगा.

हमेशा देखा गया है जब भी आपातकालीन संकट आता है तब  इनमें ज्यादा नुकसान आम जनता का ही होता है. इस आग मे पांच लोगों ने अपनी जान गवाई है. मरनेवाले मे से उमेश कोटेकर और महेश घुगले के शव मिले है, वे दोनो पुणे के बारामती से उप मुख्यमंत्री अजीत पवार से मिलने आए थे. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने जांच के आदेश तो दिए है लेकिन यह सभी जानते है कि जांच किस तरह से होती है. मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच के लिए मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को आदेश दिये है. उन्होंने अपने पत्रकार परिषद में कहा कि नगर विकास, गृह और उद्योग विकास की फाइलों के तीन करोड अठारह लाख पेपर स्कैन कर सुरक्षित रखे हुए है. परंतु अब भी उनका काम चालू था. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा जिन मंत्रियो के कार्यालय जले है उनके बैठने का इंतजाम विधान भवन, सहयाद्री अतिथीगृह और मंत्रालय की विस्तारित इमारत मे किया जाएगा. मंत्रालय 1955 मे बनकर तैयार हुआ था. तब यह मुंबई प्रांत था. महाराष्ट्र का गठन 1960 मे हुआ था. मंत्रालय का निर्माण 16 अप्रैल 1952 मे शुरू हुआ उस समय इसके निर्माण मे 65 लाख 55 हजार रूपये खर्च हुए थे. उस वक्त उसे सचिवालय नाम से जाना जाता था. तब मोरारजी देसाई मुंबई प्रांत के मुख्यमंत्री थे. दो साल पहले तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और लोकनिर्माण मंत्री छगन भुजबल ने मंत्रालय के नवनिर्माण का 1300 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया था. यह रकम जुटाने के लिए मंत्रालय के पास की झोपडपट्टी की जमीन और मंत्रियों के बंगलों को देने का सुझाव सामने आया था. इस योजना को लेकर मंत्रीमंडल में भी काफी खिंचातनी हुई थी इसलिए इस को बंद कर दिया था. इसलिए इस आग से काफी सवाल पैदा हो रहे है. मंत्रालय की सुरक्षा विभाग पर भी सवाल पैदा हो रहे है. मंत्रालय मे आग कैसे लगी? पूरी यंत्रणा होने के बावजूद भी आग पर काबू पाने के लिए 12 घंटो का समय क्यों लगा? पिछले कई सालों से लवासा, आदर्श, पी. डब्ल्यू. डी., महसूल साथ ही जल संपदा इनसे जुडे भ्रष्टाचारों की कई फाइल्स का क्या हुआ? यह प्रश्न अब भी बने हुए हैं. सीएम ने तो रिपोर्ट मे कहा है कि आदर्श घोटाले की फाइलें जली नही है, यह बयान कहां तक सही है यह आनेवाला वक्त ही बताएगा. मंत्रालय में लगी आग ने महाराष्ट्र को 50 साल पीछे धकेल दिया है. यह आग है या राजनीति? यह सवाल काफी दिनों तक चलनेवाला है. इन कारणों को ढूंढने के लिए इसकी जड़ तक जाना जरुरी है क्योंकि ‘मंत्रालय’ में आग लगने जैसी घटना अपने आप में बहुत बड़ा प्रश्न लिए खड़ा है. विधान परिषद के विरोधी पक्ष के विनोद तावडे ने इसकी जाँच फॉरेन्सिक एक्सपर्ट अधिकारियों को करनी चाहिए ऐसी मांग की है.ऐसी परिस्थिती में अपनी जान की परवाह ना करते हुए पांच जांबाज कर्मचारियों ने मंत्रालय के शिर्ष पर लहरा रहे तिरंगे को आग में जलकर खाक होने से बचा लिया. यह बात पूरे देश के लिए तथा महाराष्ट्र के लिए गर्व की बात है क्योंकी इसी तिरंगे का मान रखने के लिए कई क्रांतिकारी शहीद हुए हैं.

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