बाबा नहीं बाजीगर हैं…

Posted on April 23 2012 by pits

मुंबई  (पिट्स प्रतिनिधी): भारत देश को आस्था के नाम पर जाना जाता है. कुछ लोग इसको चमत्कारिक शक्तियां कहते हैं तो कुछ लोगों के लिए यह महज़ अंधश्रद्धा है. श्रद्धा और अंधश्रद्धा के बीच भेद ना समझनेवालों की तादाद भारत में ज्यादा है. इसी अंधश्रद्धा के नाम पर कई लोग तो अपने घरबार तक को बेचकर पैसा लुटा देते हैं और इनके इस खून पसीने की कमाई का फायदा उठाते हैं धर्म के नाम पर ढोंगी बाबा. यह कहना अतिश्योक्ति होगी कि देश में जितने भी बाबा, साधू या संत हैं वह पाखंडी है. यहां पर उन चंद लोगों के बारे में कहा जा रहा है जो धर्म के नाम पर लोगों को मुर्ख बनाते हैं और प्रपंच रचते हैं साथ ही कहते हुए बहुत अफसोस होता है कि ऐसे ढोंगी लोगों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है.

पूरे देश में बहुत सारे बाबाओं ने अलग अलग शहरों, गावों और कस्बों में अपना दबदबा बनाकर रखा है. भारत के कुछ ग्रामिण भागों में श्रद्धा के नाम पर धंधा करनेवाले लोग वहां के लोगों को भूत-प्रेत का डर दिखा कर, नोकरी और तरक्की का लालच देकर, शादी-बच्चे के नाम पर लोगों को खूब लूट रहे हैं. श्रद्दा के नाम पर इस तरह की लूट किसी आतंकवाद से कम नही है. यहां आतंकवाद शब्द का प्रयोग इसलिए कर रहा हूं क्योंकि जिस तरह आतंकवाद हमला करके देश और दुनिया की तस्वीर बदल देते हैं उसी तरह यह ढोंगी बाबा अपने बाबागिरी से लोगों का जीवन नर्क से भी बत्तर बना देते हैं. अभी हाल ही में कुछ दिनों पहले “साई के अवतार” के नाम पर जानेवाले सत्य साई बाबा के चमत्कार के बारे मे “बीबीसी डोक्युमेंटरी” ने स्पष्ट रुप से दिखाया था कि यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि हाथ की सफाई है. सत्य साई बाबा का जब देहांत हो गया उसके बाद उनकी संपत्ती का आकड़ा कई हजार करोड़ था, इसी संपत्ती को लेकर उनके ट्रस्टियों और रिश्तेदारों में काफी तनातनी हो गई थी. सत्य साई बाबा के देहांत के बाद ऐसे कई प्रश्न खड़े हुए और वह आज भी बने हुए हैं. इसी तरह निर्मल बाबा भी आजकल काफी चर्चा में हैं. निर्मल बाबा जिस तरह से लोगों को उपदेश और उनकी समस्याओं का निवारण बताते थे उससे उनकी तरफ लोग बड़े तादाद में आकर्षित हुए. बहुत सारे नीजि चैनल निर्मल बाबा के प्रवचन को लगातार १-२ घंटे तक दिखाते रहते हैं, इसी माध्यम से लोगों में इनके चमत्कारों के प्रति ज्यादा प्रचार प्रसार हो रहा है. इसी के चलते लोग इस तरह के बाबाओं के उपर विश्वास करके अपनी सोच को पूरी तरह मार देते हैं. उनके सगे साले का ऐसा कहना था कि उन्होने कई बार निर्मल बाबा को समझाया कि वह लोगों की भावनाओं से खेलना बंद कर दें लेकिन वह उनकी सुनते ही नहीं और अब हाल यह है कि निर्मल बाबा की पोल खुलती ही जा रही है. टी.वी. चैनलों पर ऐसे कई बाबाओं की पोल खोली गई है फिर भी लोग ऐसे बाबाओं के झांसे में आने से बच नहीं पाते. वह बार बार ऐसे बाबाओं के बहकावे में आ जाते हैं और अपना सबकुछ लुटा देते हैं. निर्मल बाबा का भी नाम धनी बाबाओं में शुमार है, यह वही निर्मल हैं जिनका व्यापार झारखंड में ज्यादा फलफूल नहीं पाया था इसलिए उन्होने अपना रूझान बाबागिरी की तरफ लगा दिया और आज उनका २३८ करोड़ का टर्नओवर बताया जा रहा है.

यह करोड़पति बाबा जो लोगों से ही पैसे वसूलते हैं वह लोगों की क्या मदद करेंगे? यह बाबा नहीं बाजीगर है.

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