सप्ताह की खास मुलाकात के. आर. तोषनीवाल

Posted on March 24 2012 by pits

एक व्यक्ति को कोई दूसरा व्यक्ति ही लाभ पहुंचाता है

यदि एक व्यक्ति अपनी दिशाएं साध ले तो उनकी दशा सुधर सकती है, संवर सकती है. व्यक्ति की सफलता के पीछे उस व्यक्ति के सोने की स्थिति, खाने की दिशा, रसोईघर की स्थिति, मकान का प्रवेश द्वार, भुखंड की स्थिति आदि का असर होता है और इसे ही वास्तु शास्त्र कहते है. इस विद्या को देश के कुछ लोग व्यवसाय के रूप में विकसित कर रहे हैं और के. आर. तोषनीवाल ऐसे ही शख्स हैं जो इस विद्या को विकसित करने के लिए संपूर्ण रूप से समर्पित हैं. हमारे वरिष्ठ संवाददाता चंदन पवार से हुए बातचीत के कुछ अंश.

भारत में वास्तु शास्त्र विद्या पर फिर से लोग काम कर रहे हैं, आपने कब से इस विद्या को अपना व्यवसाय बनाया?

मुझे कम से कम २५ वर्ष हो गए हैं. मैने १९८९ से इस व्यवसाय में कदम रखा, पर १९८७ से ही इस विषय के बारे में पढ़ना और समझना शुरु कर दिया था. सबसे पहले मैने अपने घर में ही इस विद्या का प्रयोग किया और इसका मुझे लाभ भी हुआ.

आपने इस विद्या को कहां से सिखा?

मैने पूरी जानकारी सिर्फ पुस्तकों से ही प्राप्त की है. शूरु के दो सालों में पुस्तकें इकट्ठा करता था और उन्हे पढ़ता था, इस से मैने बहुत सी जानकारियां प्राप्त कर ली.

इस वास्तु शास्त्र में आप किसको अपना गुरु मानते हो?

मैं खुद ही अपना गुरू हूँ.

वास्तु शास्त्र को आप श्रद्धा के रूप में देखते हैं क्या?

नहीं, यह विज्ञान है क्योंकि इसमें कोई भी काम युंही नहीं किया जाता बल्कि विज्ञान की दृष्टीकोण से देखकर, समझकर किया जाता है.

वास्तु शास्त्र को आपने क्या इसलिए चुना क्योंकि इस से आपको फायदा हुआ है?

जी हां, मैने पहले अनुभव किया और इस से बहुत फायदा हुआ. मैं चाहता था कि इस शास्त्र से दूसरों का भी भला हो इसलिए मैं इस व्यवसाय में आया.

आपके अपने वास्तु शास्त्रीय करियर में कितने लोगो ने वास्तु शास्त्र को विज्ञान माना है?

जो लोग मेरे पास आते हैं वह श्रद्धा से आते हैं और उन्होने यह विज्ञान है यह भी स्वीकारा है.

ज्योतिस शास्त्र और वास्तु शास्त्र में क्या अंतर है?

ज्योतिस शास्त्र में आपका जन्मदिन और जगह तय होते हैं पर वास्तु शास्त्र में ब्रह्मांड में जितनी भी वस्तुए हैं वह गतिशील हैं, निरंतर बदलते रहते हैं. परंतु वास्तु शास्त्र से भी पहले व्यक्ति का भाग्य आता है, यदि किसी व्यक्ति का समय अच्छा होता है तो उसके साथ सबकुछ सही ही होता है. एक व्यक्ति को कोई दूसरा व्यक्ति ही लाभ पहुंचाता है और हानि भी. साथ ही यदि प्रत्येक वस्तु अपने उचित स्थान पर हो तो व्यक्ति को इसका बहुत लाभ होता है.

क्या वास्तु दोष अच्छे कर्म पर भी भारी हैं?

जी हां, मुझे जहां तक मालूम है वहां तक तो आप कितने भी अच्छे कर्म करनेवाले हों इसके बाद भी वास्तु दोष आपके जीवन पर भारी होता है.

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