शिक्षा की मंडी

Posted on March 24 2012 by pits

नीजि स्कूलों मे चलता है उनका ही कानून,

मगर अब बनेगा सरकारी कानून…

मुंबई(चंदन पवार):

नीजि स्कूलो में चल रहा कानून ये उनका अपना बनाया हुआ है बल्कि सरकारी कानून के अनुसार बहुत कम नीजि स्कूलें अपना काम करती नजर आ रही है क्योंकि अगर वो स्कूलें सरकार की सुने तो उनको धांधली करने का अवसर नही मिलेगा. इसलिए कुछ नीजि स्कूलों में कानून को तोड़मरोड़ा जा रहा है. जैसे स्कूलों के नाम पर बहुत सारा पैसा लेना, गलत जानकारी का विज्ञापन देना, जाति, धर्म, लिंग के अनुसार स्कूलों में दाखिला देना, अंग्रेजी भाषा बोलने पर ही प्रवेश देना, बच्चो के माता पिता की मुलाकात लेकर परेशान करना, प्रायवेट ट्यूशन लेना, रिक्त पदों की जानकारी नही देना, दाखिला ना होने पर पैसे वापस नही देना, दाखिले की संपुर्ण जानकारी प्रवेश पत्र के साथ नही देना, अप्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती करना, ऐसे बहुत सारी धांधली नीजि स्कूलें करती है. अगर सरकारी कानून का कोई भी पालन करता है तो ये जो हो रहा है उस पर अंकुश लग सकता है. परंतु नीजि स्कूलवाले ये चाहते नही हैं. इसलिए केंद्र सरकार ने इनके ऊपर लगाम लगाने के लिए कानून बनाने का फैसला करने का सोचा है. “सीएबीई” की बैठक की जानकारी के अनुसार स्कूल का कानून आखिरी मोड़ पर है इसके बाद नीजि स्कूलों के ऊपर नजर रखी जाएगी और हर एक राज्य में शिक्षा न्यायाधिकरण की स्थापना की जायेगी. इसके तहत कोई भी नीजि स्कूल अगर किसी भी प्रकार की धाधली करती है तो उस स्कूल पर फौजदारी और दिवानी इस तरह की कार्यवाही करने का हक शिक्षा न्यायाधिकरण को रहेगा. पूरे देश में ४० प्रतिशत नीजि स्कूले हैं. इनमें चल रही प्रवेश प्रक्रिया के बारे में पारदर्शिता लाने का काम शिक्षा न्यायाधिकरण करेगी और इसके चलते अगर कोई भी नीजि स्कूल कोई गलती करती है तो उनको ५० लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है. ये तो कानून आने के बाद ही इसका पता चलेगा और इसके चलते नीजि स्कूलों की मनमानी पे रोक लगना संभव है.

Email- chandanpawar.pits@gmail.com

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