शिक्षा की मंडी अच्छी सुविधाओं से वंचित है सरकारी स्कूलों के बच्चे…

Posted on March 3 2012 by pits

मुंबई (चंदन पवार):

Email- chandanpawar.pits@gmail.com

हमें बड़े खेद के साथ ये कहना पड़ रहा है कि जब सरकार नीजि स्कूलों की सुविधाओं की बराबरी तो नही कर सकती है मगर कुछ प्रतिशत सुविधाएं तो दे ही सकती है. मगर यह भी बीएमसी के बच्चों के नसीब में नही होता दिख रहा है. “क्राय” इस संस्था ने जब मुंबई के बीएमसी स्कूलो में सर्वे कराया तभी एक खेद जनक बात पता चली कि ४० प्रतिशत स्कूलो में मैदान नही है. ७३ प्रतिशत स्कूलो में लायब्रेरी नही है और ज्यादातर स्कूलो में अच्छे, साफ पानी की व्यवस्था नही है. यह बात हम आपको गाँव की नही बल्कि मुंबई जैसे महानगर के बीएमसी स्कूलों की बता रहे हैं. यानी सरकार ने शिक्षा के जो भी कानून बनाए है उसमें एक विद्यार्थी को शिक्षा की २७ वस्तुएं देना अनिवार्य हैं, मगर बच्चों को छ: महिनों के बाद भी पढाई की चीजें नही मिलती हैं. इसका जिम्मेदार कौन है? क्या सरकार में देखनेवाला कोई नही है? यही नही, जो बच्चे रस्ते पर रहते हैं उनको दिया गया सामान तो अतिक्रमण विभाग के कर्मचारी ही ले जाते हैं. इसलिए ये बच्चे शिक्षा से दूर हो जाते हैं. बहुत सारे स्कूल के बाथरूम स्वच्छ नही हैं. फर्नीचर टूटा हुआ है. हैन्डीकैप बच्चों के लिए स्कूलों के ऊपरी मंजिल में जाने के लिए लिफ्ट की भी सुविधाएं नही हैं. ९५ प्रतिशत स्कूलो में स्कूल बस की भी व्यवस्था नही है. इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. देश “सुपर पावर” बनने जा रहा है और हम छोटे छोटे बदलाव नही कर पा रहे हैं. क्या दुनिया हमारी ये कमजोरी देखकर प्रभावित होगी? इसिलिए शिक्षा को उच्च स्थान देकर हमें उसकी सुविधाएं और मुफ्त शिक्षा देकर देश को आगे बढाना चाहिए, वर्ना “सुपर पावर” बनने जा रहे इस देश में शिक्षा की कमी महसूस होने लगेगी और देश को २० से २५ साल पिछे की तरफ रुख करना पड़ेगा.

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