ऐसा लग रहा है कि हम अंग्रेजों के ज़माने में जी रहे हैं मिल मजदूरों की चीख…

Posted on March 3 2012 by pits

मुंबई (चंदन पवार):

मिल मजदूरों के घरों को लेकर चली आ रही कई सालों की समस्या आज तक किसी भी पार्टी की अदालत में सुलझाई नहीं गई है. हर कोई चुनाव के वक्त ये वादा करता है कि इनकी समस्या जरूर सुलझाई जाएगी लेकिन ये सब दावे खोखले नज़र आ रहे हैं. कौन है जो ये होने नहीं दे रहा है?

इस सिलसिले में जब मिल मजदूर युनियन के अध्यक्ष दत्ता इसवलकर से बात की गई तो उनका कहना था,” जब तक ढ़ाई लाख मिल मजदूरों को उनका हक नहीं मिलता तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी.” साथ ही इसी युनियन के सेक्रेटरी प्रवीन घाग का कहना है कि,” सभी पार्टियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और सभी पार्टियां मिलकर इन मिल मजदूरों को यहाँ से हटाने की बात कर रहे हैं. इस जगह पर मॅाल और टावर बनाने की योजना है, यह हम लोग कभी नहीं होने देंगे. हम आखिरी दम तक लड़ते रहेंगे.”

आज हर तरफ ये देखने को मिल रहा है कि भूमिपुत्र ही अपने मूलभूत सुविधा पाने के लिए अपने ही सरकार से लड़ रहे हैं. खून की होली खेली जा रही है. क्या यही दिन मिल मजदूरों को देखना बाकी रह गया है? आजतक उन्होने जो आंसु बहाए है. क्या अब भी उनको न्याय नही मिलेगा? क्या इस महाराष्ट्र की राजनीति में नेता इतने कठोर हो गए हैं कि जिन लोगों ने अपने बलबूते पर मुंबई को नया आयाम दिया है, उन्ही भूमिपुत्रों को आज न्याय के लिए लड़ना, झगड़ना पड़ रहा है. मिल मजदूरों की हालत आज बद से बदतर हो गई है. ना उनका खुद का भविष्य है ना उनके परिवार का. आज इन कामगारों के घर में दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल होते जा रहा है. उनके बच्चे अच्छी शिक्षा नही ले पा रहे हैं. इनके हालात की अगर बात की जाए तो फुटपाथ पर बैठे उस परिवार जैसी है जो दिन भर बाहर रहकर रात का एक वक्त का खाना खाते हैं. मतलब रहते तो हैं चॅाल में मगर जी रहे हैं फुटपाथ की जिंदगी. ये सब इनके लिए कम नही था कि हमारे आम आदमी की मसीहा सरकार ने बुढ़े मिल मजदूर कामगार और इनके बच्चों पर और महिलाओं पर जब लाठियां बरसाई गई हैं उसे देख किसी भी कमज़ोर दिलवालों को दिल का दौरा पड़ सकता है.

हमको हमारा घर कब मिलेगा यह पुछने के लिए मिल मजदूर सड़क पर उतरे थे. सरकार का यह कहना है कि हम सिर्फ २५ हजार कामगारों को ही घर दे सकते हैं. तो हम पुछते हैं कि बाकी लोग कहाँ जाएंगे और किस हिसाब से ये मजदूरों में घरों का बंटवारा करेंगे? गलत ढ़ंग से अपने दस्तावेज बनाकर घर पानेवाले कई लोग मुंबई में हैं तो यहाँ जन्मे मिल मजदूरों को ये कैसे तोल रहे हैं? सैकड़ों की तादाद में पुलिस और दंगल विरोधी कृतिदल के पुलिस हज़ारों में थे उन्होने बल का प्रयोग कर ६०० से ७०० मिल मजदूरों को अपने गाड़ी में डालकर भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में ले जाया गया. बिचारे, बेबस मिल मजदूर सिर्फ यही बोल रहे थे कि हमें एक घर चाहिए “ हम यहाँ के नागरिक है. हम दंगलखोर नही हैं, हमको बचाओ, कोई है जो हमारी सुने.” मजदूरों का कहना था कि ऐसा लग रहा है कि हम अंग्रेजों के जमाने में जी रहे हैं. ऐसी करूणा भरी आवाज़ निकल रही थी. जब सभी कामगारो ने हमारे राज्य के मसीहा पृथ्वीराज चव्हाण को निवेदन देंने कि बात की तो मुख्यमंत्री जी के पास इनके लिए वक्त नही है. ये देख कामगारों में प्रचंड आक्रोश फैल गया और हम अब मुख्यमंत्री को मिलके ही जाएंगे. ऐसी बात कही मगर जब भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन के वरीष्ठ पुलिस निरीक्षक विक्रांत पाटिल ने कामगारों के निवेदन लेकर मैं खुद आपकी मुलाकात मुख्यमंत्री जी से करवाऊँगा, ऐसा आश्वासन दिया तब जाकर कामगारों ने अपना रूख बदला. लेकिन यह बात अजीब लग रही है कि महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कोई भी प्रतिनिधी कामगारों को मिलने नही पहुँचा. मुख्यमंत्री की मुलाकात के लिए एक पुलिस निरीक्षक को आश्वासन देना पड़ा. यह बात कुछ हजम नही हो रही है.

अगर इन सभी बातों पर गौर किया जाए तो एक तरफ दो वक्त की रोटी के लिए जीने मरने की तैयारी की जाती है और दूसरी ओर अरबों खरबों के महल बनानेवाले इस घटना को एक छोटी सी बात के रूप में देखते हैं. कई लोगों के सामने यह सवाल होता है कि मैं क्या क्या खाऊँ? और गरीबी से लाचार लोगों के सामने यह सवाल है कि “मैं क्या खाऊँ?” हमें सोचना पड़ेगा कि क्या हम इन मिल मजदूरों का साथ देंगे? जो अपने ही मिट्टी में अपना घर तलाश कर रहे हैं. इनके आंसु पोछने के लिए पूरे भारत में अरबों खरबों की संपत्ती रखनेवाले मे से कोई भी” पुण्य का धनी” नहीं बनना चाहता है. इन गरीब लोगों की दुआ किस के भी काम नही आएगी? क्या हम देश में अपने हक के लिए लड़ रहे लोगों के प्रति किसी को भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारी नही लगती है? अगर इन लोगों के लिए कोई अपनी संपत्ती मे से थोड़ी सी संपत्ती का त्याग कर इनके दुख अपना कर इनको खड़ा कर सकता है तो यहाँ पर नहीं तो कम से कम भगवान के द्वार पर जरूर आपको इसका पुण्य मिलेगा.

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