भारत किस राह पर है?

Posted on February 29 2012 by pits

भारत को विकसित करने में पहला कदम भारतीय नागरिकों का होना चाहिए…

मुंबई (रजिया निसार):
लोग अक्सर बहस करते हुए पाए जाते हैं कि भारत विकासशील देश है या विकसित? पर क्या इस सवाल का जवाब देना इतना आसान है? जहाँ भारत ने कामयाबियों के आसमान को छुआ है वहीं बहुत सी कुरितियों और समस्याओं में अब भी इसके पैर जकड़े हुए हैं. जहाँ एक तरफ हिंदुस्तान रिमोट सेंसिंग सेटलाइट्स और दूध उत्पादन में पहले स्थान पर है, साथ ही गेहूँ और चावल में दूसरे बड़े उत्पादक हैं वहीं दूसरी तरफ हमारे देश में बहुत सी बुराईंयां मौजूद है. आज भी हमारे देश में दहेज और कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक मसलों की बात में बहुत पीछे हैं हम. आधूनिकता की आड़ में हम खूद के बदलने के दावे तो बहुत करते हैं पर वास्तव में ऐसा है नहीं. आज भी दहेज लेने और देने की बात नई नहीं लगती, भले ही सरकार कितने ही कानून क्यों ना बना ले. आज भी कई राज्यों में लड़कियों को एक बोझ माना जाता है क्योंकि दहेज देने की हैसियत उनके माता पिता नही रखते. गरीब होने के बावजूद भी दहेज का कड़वा घूँट उन्हे पीना ही पड़ता है, अगर दहेज देने की क्षमता नही है तो फिर लड़कियां घर में कुंवारी ही रह जाएंगी. कानून और नीतियां बनाना सरकार का काम है पर उस पर अमल करने की जिम्मेदारी तो हमारी है, भारत के नागरिकों की. सरकार तो नियम कानून बनाकर अपना काम कर रही है, पर कहीं ना कहीं चूक हमसे ही हो रही है. हम ही उन नियमों को अपने आचरण में नही ला रहे.
अगर देश की प्रगति की बात करें तो हमने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अच्छा मुकाम हासिल किया है, चाहे बात तकनीक की हो या विज्ञान की. इस तकनीक का इस्तेमाल कर ही हमने कृषि के क्षेत्र में सराहनीय काम किया है जिस से हमारा देश गेहूँ और चावल के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है. पर क्या इस बात के आधार पर कहना उचित होगा कि हमारा देश विकसित हो चुका है? क्योंकि तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करने के बावजूद भी देश के कई राज्य पानी और बिजली जैसी जरूरी चीज़ों के लिए संघर्ष करते हुए नज़र आ रहे हैं. अगर देश में मौजूद सुविधाओं का सही तरह से इस्तेमाल किया जाए तो इन समस्याओं से निपटने की थोड़ी बहुत उम्मीद जगती है.
पर देश विकसित है या विकासशील इस मुद्दे को सिर्फ बहस कर छोड़ देने से ही काम नही चलेगा. क्योंकि यह सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नही है बल्कि प्रत्येक भारतीय का फर्ज़ है कि वो अपने देश को विकसित बनाने में सहयोग दे. कोई भी राष्ट्र विकसित तभी होता है जब उस देश के लोगों की सोच विकसित हो.

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