जो खिलाते हैं लोगों को उनके ही पेट भूखे…

Posted on February 29 2012 by pits

मुंबई (पिट्स प्रतिनिधी):

१८९० में शुरु हुए १२२ साल पुराने डिब्बेवालों के प्रोफेशन का भविष्य खतरे में नज़र आ रहा है. ऐसा सुनने में आया है कि डिब्बेवालों की नई पीढ़ि अब पढ़ लिख रही है, ऐसे में वह इस प्रोफेशन को अपना कॅरियर नही बनाना चाहते. इस वजह से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आगे चलकर डब्बे पहुँचाने की यह परंपरा समाप्त हो सकती है?

ज्यादातर युवक यह काम करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे जिसकी सबसे बड़ी वजह है इस काम में मिलनेवाली कम सैलरी. इस मँहगाई के ज़माने में ८००० प्रति माह बहुत ही कम है अपना गुजर बसर करने के लिए. जिसकी वजह से युवकों का रूझान इस ओर कम हो रहा है. परंतु इस बात से डिब्बेवाले सहमत नही है. उनका कहना है कि इस काम में उनके सगे संबंधी ही रहते हैं और उनका काम एकजुट होने की वजह से होता है और भविष्य में भी वह इस काम को इसी लगन से करते रहेंगे.

मुंबई के ५००० डिब्बेवाले औसतन ८वीं पास हैं और यह लोग २,००,००० डिब्बे की डिलिवरी रोज़ाना करते हैं. प्रति डिब्बे पर ४०० रुपये अपनी मेहनताना लेते हैं. पर यह भी उचित है कि इस मँहगाई के दौर में इतने कम पैसों में अपनी ज़िंदगी गुज़ारना बहुत ही मुश्किल है. तो क्या इस वजह से मुंबई के डिब्बेवाले अब अपने इस काम से नदारद हो जाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा.

Powered By Indic IME