छोटे बच्चों के हाथ में भीख का कटोरा कौन है इसका जिम्मेदार?

Posted on February 29 2012 by pits

मुंबई (चंदन पवार)

मुंबई जैसे महानगर में आपको दो तरह के लोग देखने को मिलेंगे. इनमें से एक वर्ग का कहना है मैं क्या क्या खाऊं? और दूसरे गरीब वर्ग का कहना है मैं क्या खाऊं?. क्या हम बता सकते हैं या सोच सकते हैं कि यह सब क्यों हो रहा है?

हाल ही में मुंबई पुलिस ने भीख माँगनेवाले बच्चों को पकड़ा तब यह बात सामने आयी कि इन ३ से १० साल की उम्र के बच्चों को भीख माँगने के लिए उनके अपने ही माता पिता ने मजबूर किया है. जिन हाथों में पेन या पेन्सिल होनी चाहिए थी उस हाथों में इन बेरहम माता पिताओ ने भीख का कटोरा थमा दिया है. क्यों ऐसा किया उन्होने जब उनसे पुछा गया तो उन्होने कहा कि दिन में १० से १२ घंटे बच्चो को रेल्वे स्टेशन, मंडी बस स्थानक पर अगर इन्हें खड़ा किया जाए तो इनकी दिन की कमाई ५०० से १००० रुपये के बीच में होती है. इसका लालच इन बच्चों के माता पिता को लग गया है. इसलिए इन्होने अपने कोमल फूलों जैसे बच्चों को बेरहमी से तड़पने के लिए छोड़ दिया है. मगर एक और बात का पता चला है कि कुछ गिरोह भी छोटे बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर करते हैं. इसके बदले में बच्चों को कुछ कपड़े और खाना मिल जाता है. क्या हम सरकार से पूछ सकते है् कि आपका प्रशासन ये सब देखकर भी अजान क्यों बना हुआ है? क्या इनको इन बच्चों पर रहम नही आता है? ऐसे बच्चों के लिए बाल आश्रम बनाए गए हैं फिर भी इन बच्चों को वहाँ ले जाया नही जाता है. क्या हमें ऐसा ही समाज बनाने की चाहत है और देश को प्रदर्शित करना है? अगर प्रशासन अपना काम पूरी ईमानदारी से करने लगा तो देश से ऐसी छोटी बातें ही नही बल्कि भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी जैसे दीमक को देश से बाहर भगा सकते हैं.

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