कुर्सी के लिए बागी बनना पड़ता है साहब…

Posted on February 29 2012 by pits

मुंबई (चंदन पवार)

मुंबई बीएमसी चुनाव की तारीख आते ही सभी दलों की कवायत शुरु हो गई, सभी कार्यकर्ताओं ने अपने अपने दम पर पार्टी नेताओं से टिकट हासिल कर ली है. मगर जब कुछ कार्यकर्ता को टिकट नही मिला तब उन्होने पार्टी के साथ विद्रोह करना शुरु कर दिया.

भाजपा, शिवसेना, मनसे, राकापा, काँग्रेस और रिपाई सभी पार्टी के नाराज़ कार्यकर्ता ने विरोध प्रदर्शन करते हुए सड़क पर उतर आए और लगभग सभी पार्टी कार्यकर्ताओ ने पार्टी से अपने पद से इस्तीफा देकर चुनाव के लिए निर्दलीय पर्चा दाखिल कर दिया है. मिली जानकारी के अनुसार काँग्रेस के ४०, राकांपा के ८, मनसे के ९ और शिवसेना के १० कार्यकर्ता बगावत पर उतर आए है. इन्होने निर्दलीय पर्चा दाकिल कर दिया है. इसके चलते अगर काँग्रेस की बात की जाए तो मुसलमानो में काँग्रेस के टिकट बटवारे को लेकर काफी नाराज़गी फैल गई है. काँग्रेस ने जिन १३९ सिटों पर टिकटों की घोषणा की है उसमें सिर्फ १३ मुसलमानो को प्रत्याशी बनाया गया है. यह संख्या बहुत कम है. इसे लेकर मुस्लिम पदाधिकारियों में असंतोष है. हिंदी भाषियों को भी उनके हिसाब से प्रतिनिधी नही मिला, ऐसा देखने को मिल रहा है. जबकि काँग्रेस के साथ गठजोड़वाली राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी ने अपने हिस्से में आई ५८ सीटों के कोटे मे से १२ सीटें मुसलमान उम्मीदवारों को दी है. ये संख्या काँग्रेस से दो गुना अधिक है. इस बार काँग्रेस से पहली बार ११ गुजराती उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है. इसका कारण गुजराती ज्यादातर भाजपा पार्टी को वोट करते है, इसलिए गुजराती मतदाताओं कि खीचने के लिए ये कदम उठाया गया है. काँग्रेस ने और आगे कदम बढाते हुए इस बार ५० प्रतिशत मराठी उम्मीदवारों को टिकट दिया है. ये सब मनसे और शिवसेना के मतदाताओं को अपनी तरफ खीचने के लिए ऐसा किया है.

 

मगर आम जनता ये सब देखकर हैरान हो गई है कि २० साल से भी ज्यादा एक पार्टी में काम करने के बाद भी लोग कुर्सी या सत्ता पाने के लिए दूसरी पार्टी को मिल जाते है या अपक्ष चुनाव लड़ते है. क्या इसको ही राजनीति कहते हैं? क्या इनको पार्टी के तत्वों से कुछ लेना देना नही है? ये सब कुर्सी के लिए ही हो रहा है? क्या इन बागियों को सही में समाजसेवा करनी है? इसलिए ये बागी बने है? इसका जवाब तो जनता के पास ही मिलेगा.


काँग्रेस के बागी उम्मीदवार

मोहनसिंह नेगी                     २१३

रवि मोहिते                        २१५

शांताराम ब्रीद(पूर्व नगरसेवक)                    २१०

अश्विन नाईक                                  १८५

एन विट्ठल                                    १७०

नयना शाह                                    १२

बलदेव सिंह मनकू (नगरसेवक)                  ३२

सुप्रिया कदम (नगरसेवक)                      १२५

धर्मेंद्र पाठक(नगरसेवक)                        १७१

आनंद लोंढे और विष्णु गायकवाड(नगरसेवक)१८०

मीना देसाई (नगरसेविका)                      १८२

सुरेखा सखपाल                               २०१

 

भाजपा-शिवसेना के बागी उम्मीदवार

अर्जुन नाईक(शाखाप्रमुख)                           १८२

उज्जवला बेन(भाजपा नगरसेवक की पत्नी)                         २१२

ज्योति अलवाणी(पूर्व भाजपा नगरसेवक की पत्नी)    ८०

मानसी सारंगा(शाखा प्रमुख की पत्नी)                 १३४

अश्विनी घोड़गे(शिवसेना नगरसेवक मोहन लोकेश्वर की उम्मीदवार)

मनीषा पवार(भाजपा कार्यकर्ता)                     १९२

संजय भरणकर                                  १८५

 

मनसे के बागी उम्मीदवार

दीपक हांडे                       १२२

सरस्वती पुलवरिया                २४५

दीपिका निकम

 

राकांपा के बागी उम्मीदवार

ज्योति                          २०१

जलिधर धुमाल                   १९७

उदय उरणकर                    १९८

 

पार्टी छोड़ने पर मिली उम्मीदवारी

सभी पूर्व नगरसेविका को पार्टी में टिकट दिया

वनिता इसुलकर(शिवसेना)         राकांपा

अंजलि सातरडेकर(शिवसेना)        काँग्रेस

नीलिमा डोलस(शिवसेना)           काँग्रेस

सुवर्णा करांजे(शिवसेना)            काँग्रेस

Powered By Indic IME