सुप्रिया सुले- सशक्त महिला युवा नेता

Posted on February 6 2012 by pits

मुंबई (चंदन पवार) । खासदार सुप्रिया सुले की पहचान उनके पिताजी शरद पवार से होती थी, मगर अब बात अलग है,लोग अभी सुप्रिया सुले जी को उनकी स्वतंत्र पहचान से जानने लगे हैं. बी.एस.सी. (मायक्रोबालॉजी) की शिक्षा लेकर राजनीति में उतरी सुप्रिया सुले जी एन.सी.पी. की पहली महिला सांसद बनी और महाराष्ट्र के लोगों की आवाज सरकार तक पहुँचाई. साथ ही लोगों के प्रति अपना समाजिक कर्तव्य समझकर उन्होने महिलाओं के साथ जो अन्याय होते हैं और हो रहे हैं, इसके खिलाफ पूरे देश में जो भी भ्रुण हत्या चल रही है उसके खिलाफ उन्होने लेक वाचवा अभियान चालू करके देश के लोगो् को एक संदेश दिया है. इस कार्य को उन्होने मराठवाडा के िंसधखेड राजा(बुलढाणा) से औरंगाबाद से पदयात्रा निकालकर चालू किया और अपनी एक अलग पहचान बनाई. इतना ही नही महिलाओं के लिए उन्होने सेल्फ हेल्प ग्रूप के माध्यम से मदद की है. महाराष्ट्र में उन्होने मुफ्त शिक्षा देने के लिए अभियान चलाया और सरकारी स्वूâलों में बच्चो को नई नई टेक्नोलाजी की जानकारी मिलने के लिए साधन उपलब्ध कराए. उनका एक मकसद यह भी है कि देश की महिला शिक्षित और सशक्त बने. किसी भी आधार के बिना महिला अपना घर चला सके इस तरह की योजनाए उन्होने लाई है.इसीलिए आज सुप्रिया सुले एन.सी.पी की युथ लीडर होकर उभरी है. उनका पार्टी में तो अच्छा रुतबा है लेकिन नौजवान लोगों में और एन.सी.पी के सभी युथ लीडर के बीच में उनकी एक अलग ही पहचान बनी हुई है. इसीलिए सुप्रिया सुले जी की लिडरता और समाजिक दायित्व के प्रति रुचि देखने के बाद लोग अगर एन.सी.पी. पार्टी से महाराष्ट्र की पहली महिला मुख्यमंत्री देखने के सपने देख रही हो तो उसमें कोई दो राय नही है.

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